आनंद कोई बाहरी वस्तु नहीं जिसे प्राप्त किया जाए—यह तो हमारे भीतर विद्यमान आत्मा का स्वभाव है। जगद्गुरु स्वामी संदीपानी जी के प्रेरणादायी वचनों में हम जानेंगे कि जीवन का वास्तविक सुख बाहर नहीं, बल्कि अपने भीतर छिपा है। इस वीडियो के माध्यम से मन की शांति, आत्मिक संतुलन और सच्चे आनंद के रहस्य को गहराई से समझें।
ग्रामोदय केवल विकास का एक मॉडल नहीं, बल्कि एक संपूर्ण दृष्टिकोण है—जहाँ गाँव का उत्थान सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सभी स्तरों पर होता है। जब हर व्यक्ति जागरूक, आत्मनिर्भर और मूल्य-आधारित जीवन अपनाता है, तब पूरा समाज स्थायी प्रगति की दिशा में आगे बढ़ता है।
‘अहं ब्रह्मास्मि’ कोई अहंकारपूर्ण घोषणा नहीं—यह तो आत्मिक अनुभूति का स्वर है, जहाँ साधक अपने भीतर परम सत्य का साक्षात्कार करता है। यह समझ बताती है कि हमारा वास्तविक स्वरूप शरीर या मन तक सीमित नहीं, बल्कि अनंत, शांत और प्रकाशमय चेतना है। यही बोध जीवन को सरल, सार्थक और सत्य के मार्ग की ओर अग्रसर करता है।
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